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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 40

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परंतप | एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे परंतप अर्जुन ! मेरी दिव्य विभूतियोंका अन्त नहीं है। मैंने तुम्हारे सामने अपनी विभूतियोंका जो विस्तार कहा है, यह तो केवल संक्षेपसे कहा है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे परंतप अर्जुन ! मेरी दिव्य विभूतियोंका अन्त नहीं है। मैंने तुम्हारे सामने अपनी विभूतियोंका जो विस्तार कहा है, यह तो केवल संक्षेपसे कहा है।

English Meaning

There is no end to My divine gloreis, O Arjuna, but this is a brief statement by Me of the particulars of My divine glories.

There is no end to My divine gloreis, O Arjuna, but this is a brief statement by Me of the particulars of My divine glories.

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