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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 41

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा | तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसंभवम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो-जो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उस-उसको तुम मेरे ही तेज-(योग-) के अंशसे उत्पन्न हुई समझो।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो-जो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उस-उसको तुम मेरे ही तेज-(योग-) के अंशसे उत्पन्न हुई समझो।

English Meaning

Whatever being there is glorious, prosperous or powerful, that know thou to be a manifestation of a part of My splendour.

Whatever being there is glorious, prosperous or powerful, that know thou to be a manifestation of a part of My splendour.

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