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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 42

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

अथवा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन | विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अथवा हे अर्जुन ! तुम्हें इस प्रकार बहुत-सी बातें जाननेकी क्या आवश्यकता है? मैं अपने किसी एक अंशसे सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त करके स्थित हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अथवा हे अर्जुन ! तुम्हें इस प्रकार बहुत-सी बातें जाननेकी क्या आवश्यकता है? मैं अपने किसी एक अंशसे सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त करके स्थित हूँ।

English Meaning

But, of what avail to thee is the knowledge of all these details, O Arjuna? I exist, supporting this whole world by one part of Myself.

But, of what avail to thee is the knowledge of all these details, O Arjuna? I exist, supporting this whole world by one part of Myself.

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