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श्रीमद्भगवद्गीता · भक्ति योग

श्लोक 1

भक्ति योग · Bhakti Yoga

मूल पाठ

अर्जुन उवाच | एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते | येचाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो भक्त इस प्रकार निरन्तर आपमें लगे रहकर आप-(सगुण भगवान्-) की उपासना करते हैं और जो अविनाशी निराकारकी ही उपासना करते हैं, उनमेंसे उत्तम योगवेत्ता कौन हैं?

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो भक्त इस प्रकार निरन्तर आपमें लगे रहकर आप-(सगुण भगवान्-) की उपासना करते हैं और जो अविनाशी निराकारकी ही उपासना करते हैं, उनमेंसे उत्तम योगवेत्ता कौन हैं?

English Meaning

Arjuna said Those devotees who, ever steadfast, thus worship Thee and those also who worship the imperishable and the unmanifested which of them are better versed in Yoga?

Arjuna said Those devotees who, ever steadfast, thus worship Thee and those also who worship the imperishable and the unmanifested which of them are better versed in Yoga?

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