ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · भक्ति योग

श्लोक 7

भक्ति योग · Bhakti Yoga

मूल पाठ

तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात् | भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पार्थ ! मेरेमें आविष्ट चित्तवाले उन भक्तोंका मैं मृत्युरूप संसार-समुद्रसे शीघ्र ही उद्धार करनेवाला बन जाता हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पार्थ ! मेरेमें आविष्ट चित्तवाले उन भक्तोंका मैं मृत्युरूप संसार-समुद्रसे शीघ्र ही उद्धार करनेवाला बन जाता हूँ।

English Meaning

To those whose minds are set on Me, O Arjuna, verily I become ere long the saviour out of the ocean of Samsara.

To those whose minds are set on Me, O Arjuna, verily I become ere long the saviour out of the ocean of Samsara.

आगे पढ़ें — भक्ति योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता