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श्रीमद्भगवद्गीता · भक्ति योग

श्लोक 6

भक्ति योग · Bhakti Yoga

मूल पाठ

ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः | अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

परन्तु जो कर्मोंको मेरे अर्पण करके और मेरे परायण होकर अनन्ययोगसे मेरा ही ध्यान करते हुए मेरी उपासना करते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

परन्तु जो कर्मोंको मेरे अर्पण करके और मेरे परायण होकर अनन्ययोगसे मेरा ही ध्यान करते हुए मेरी उपासना करते हैं।

English Meaning

But to those who worship Me, renouncing all actions in Me, regarding Me as the supreme gaol, meditating on Me with single-minded Yoga.

But to those who worship Me, renouncing all actions in Me, regarding Me as the supreme gaol, meditating on Me with single-minded Yoga.

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