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श्रीमद्भगवद्गीता · भक्ति योग

श्लोक 11

भक्ति योग · Bhakti Yoga

मूल पाठ

अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः | सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अगर मेरे योग-(समता-) के आश्रित हुआ तू इस(पूर्वश्लोकमें कहे गये साधन-) को भी करनेमें असमर्थ है, तो मन-इन्द्रियोंको वशमें करके सम्पूर्ण कर्मोंके फलका त्याग कर।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अगर मेरे योग-(समता-) के आश्रित हुआ तू इस(पूर्वश्लोकमें कहे गये साधन-) को भी करनेमें असमर्थ है, तो मन-इन्द्रियोंको वशमें करके सम्पूर्ण कर्मोंके फलका त्याग कर।

English Meaning

If thou art unable to do even this, then, resorting to union with Me, renounce the fruits of all actions with the self controlled.

If thou art unable to do even this, then, resorting to union with Me, renounce the fruits of all actions with the self controlled.

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