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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 16

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः | भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मनकी प्रसन्नता, सौम्य भाव, मननशीलता, मनका निग्रह और भावोंकी शुद्धि -- इस तरह यह मन-सम्बन्धी तप कहा जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मनकी प्रसन्नता, सौम्य भाव, मननशीलता, मनका निग्रह और भावोंकी शुद्धि -- इस तरह यह मन-सम्बन्धी तप कहा जाता है।

English Meaning

Serenity of mind, good-heartedness, self-control, purity of nature this is called mental austerity.

Serenity of mind, good-heartedness, self-control, purity of nature this is called mental austerity.

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