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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 17

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

श्रद्धया परया तप्तं तपस्तत्ित्रविधं नरैः | अफलाकाङ्क्षिभिर्युक्तैः सात्त्विकं परिचक्षते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

परम श्रद्धासे युक्त फलेच्छारहित मनुष्योंके द्वारा तीन प्रकार-(शरीर, वाणी और मन-) का तप किया जाता है, उसको सात्त्विक कहते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

परम श्रद्धासे युक्त फलेच्छारहित मनुष्योंके द्वारा तीन प्रकार-(शरीर, वाणी और मन-) का तप किया जाता है, उसको सात्त्विक कहते हैं।

English Meaning

This threefold austerity, practised by steadfast men, with the utmost faith, desiring no reward, they call Sattvic.

This threefold austerity, practised by steadfast men, with the utmost faith, desiring no reward, they call Sattvic.

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