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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 26

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते | प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पार्थ ! परमात्माके 'सत्'--इस नामका सत्तामात्रमें और श्रेष्ठ भावमें प्रयोग किया जाता है तथा प्रशंसनीय कर्मके साथ 'सत्' शब्द जोड़ा जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पार्थ ! परमात्माके 'सत्'--इस नामका सत्तामात्रमें और श्रेष्ठ भावमें प्रयोग किया जाता है तथा प्रशंसनीय कर्मके साथ 'सत्' शब्द जोड़ा जाता है।

English Meaning

The word ï1Satï1 is used in the sense of reality and of goodness; and so also, O Arjuna, the word ï1Satï1 is used in the sense of an auspicious act.

The word ï1Satï1 is used in the sense of reality and of goodness; and so also, O Arjuna, the word ï1Satï1 is used in the sense of an auspicious act.

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