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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 12

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मणः फलम् | भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु संन्यासिनां क्वचित्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कर्मफलका त्याग न करनेवाले मनुष्योंको कर्मोंका इष्ट, अनिष्ट और मिश्रित -- ऐसे तीन प्रकारका फल मरनेके बाद भी होता है; परन्तु कर्मफलका त्याग करनेवालोंको कहीं भी नहीं होता।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

कर्मफलका त्याग न करनेवाले मनुष्योंको कर्मोंका इष्ट, अनिष्ट और मिश्रित -- ऐसे तीन प्रकारका फल मरनेके बाद भी होता है; परन्तु कर्मफलका त्याग करनेवालोंको कहीं भी नहीं होता।

English Meaning

The threefold fruit of action (evil, good and mixed) accrues after death to the non-abandoners, but never to the abandoners.

The threefold fruit of action (evil, good and mixed) accrues after death to the non-abandoners, but never to the abandoners.

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