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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 14

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् | विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इसमें (कर्मोंकी सिद्धिमें) अधिष्ठान तथा कर्ता और अनेक प्रकारके करण एवं विविध प्रकारकी अलग-अलग चेष्टाएँ और वैसे ही पाँचवाँ कारण दैव (संस्कार) है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इसमें (कर्मोंकी सिद्धिमें) अधिष्ठान तथा कर्ता और अनेक प्रकारके करण एवं विविध प्रकारकी अलग-अलग चेष्टाएँ और वैसे ही पाँचवाँ कारण दैव (संस्कार) है।

English Meaning

The seat (body), the doer, the various senses, the different functions of various sorts, and the presiding deity, also, the fifth.

The seat (body), the doer, the various senses, the different functions of various sorts, and the presiding deity, also, the fifth.

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