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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 10

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः | एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भोगबुद्धिसे संग्रह न करनेवाला, इच्छारहित और अन्तःकरण तथा शरीरको वशमें रखनेवाला योगी अकेला एकान्तमें स्थित होकर मनको निरन्तर परमात्मामें लगाये।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

भोगबुद्धिसे संग्रह न करनेवाला, इच्छारहित और अन्तःकरण तथा शरीरको वशमें रखनेवाला योगी अकेला एकान्तमें स्थित होकर मनको निरन्तर परमात्मामें लगाये।

English Meaning

Let the Yogi try constantly to keep the mind steady, remaining in solitude, alone, with the mind and the body controlled, and free from hope and covetousness.

Let the Yogi try constantly to keep the mind steady, remaining in solitude, alone, with the mind and the body controlled, and free from hope and covetousness.

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