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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 11

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः | नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

शुद्ध भूमिपर, जिसपर क्रमशः कुश, मृगछाला और वस्त्र बिछे हैं, जो न अत्यन्त ऊँचा है और न अत्यन्त नीचा, ऐसे अपने आसनको स्थिरस्थापन करके।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

शुद्ध भूमिपर, जिसपर क्रमशः कुश, मृगछाला और वस्त्र बिछे हैं, जो न अत्यन्त ऊँचा है और न अत्यन्त नीचा, ऐसे अपने आसनको स्थिरस्थापन करके।

English Meaning

In a clean spot, having established a firm seat of his own, neither too high nor too low, made of a cloth, a skin and Kusa-grass, one over the other.

In a clean spot, having established a firm seat of his own, neither too high nor too low, made of a cloth, a skin and Kusa-grass, one over the other.

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