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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 43

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् | यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे कुरुनन्दन! वहाँपर उसको पूर्वजन्मकृत साधन-सम्पत्ति अनायास ही प्राप्त हो जाती है। फिर उससे वह साधनकी सिद्धिके विषयमें पुनः विशेषतासे यत्न करता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे कुरुनन्दन! वहाँपर उसको पूर्वजन्मकृत साधन-सम्पत्ति अनायास ही प्राप्त हो जाती है। फिर उससे वह साधनकी सिद्धिके विषयमें पुनः विशेषतासे यत्न करता है।

English Meaning

Thee he comes in touch with the knowledge acired in his former body and strives more than before for perfection, O Arjuna.

Thee he comes in touch with the knowledge acired in his former body and strives more than before for perfection, O Arjuna.

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