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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 42

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् | एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अथवा (वैराग्यवान्) योगभ्रष्ट ज्ञानवान् योगियोंके कुलमें ही जन्म लेता है। इस प्रकारका जो यह जन्म है, यह संसारमें बहुत ही दुर्लभ है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अथवा (वैराग्यवान्) योगभ्रष्ट ज्ञानवान् योगियोंके कुलमें ही जन्म लेता है। इस प्रकारका जो यह जन्म है, यह संसारमें बहुत ही दुर्लभ है।

English Meaning

Or he is born in a family of even the wise Yogis; verily a birth like this is very difficult to obtain in this world.

Or he is born in a family of even the wise Yogis; verily a birth like this is very difficult to obtain in this world.

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