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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 41

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः | शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वह योगभ्रष्ट पुण्यकर्म करनेवालोंके लोकोंको प्राप्त होकर और वहाँ बहुत वर्षोंतक रहकर फिर यहाँ शुद्ध श्रीमानोंके घरमें जन्म लेता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

वह योगभ्रष्ट पुण्यकर्म करनेवालोंके लोकोंको प्राप्त होकर और वहाँ बहुत वर्षोंतक रहकर फिर यहाँ शुद्ध श्रीमानोंके घरमें जन्म लेता है।

English Meaning

Having attained to the worlds of the righteous and having dwelt there for everlasting years, he who fell from Yoga is reborn in a house of the pure and wealthy.

Having attained to the worlds of the righteous and having dwelt there for everlasting years, he who fell from Yoga is reborn in a house of the pure and wealthy.

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