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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 40

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

श्रीभगवानुवाच | पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते | नहि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- हे पृथानन्दन! उसका न तो इस लोकमें और न परलोकमें ही विनाश होता है; क्योंकि हे प्यारे! कल्याणकारी काम करनेवाला कोई भी मनुष्य दुर्गतिको प्राप्त नहीं जाता।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- हे पृथानन्दन! उसका न तो इस लोकमें और न परलोकमें ही विनाश होता है; क्योंकि हे प्यारे! कल्याणकारी काम करनेवाला कोई भी मनुष्य दुर्गतिको प्राप्त नहीं जाता।

English Meaning

The Blessed Lord said O Arjuna, neither in this world, nor in the next world is there destruction for him; none, verily, who does good, O My son, ever comes to grief.

The Blessed Lord said O Arjuna, neither in this world, nor in the next world is there destruction for him; none, verily, who does good, O My son, ever comes to grief.

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