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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 14

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया | मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया बड़ी दुरत्यय है अर्थात् इससे पार पाना बड़ा कठिन है। जो केवल मेरे ही शरण होते हैं, वे इस मायाको तर जाते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया बड़ी दुरत्यय है अर्थात् इससे पार पाना बड़ा कठिन है। जो केवल मेरे ही शरण होते हैं, वे इस मायाको तर जाते हैं।

English Meaning

Verily, this divine illusion of Mine, made up of the (three) qualities (of Nature) is difficult to cross over; those who take refuge in Me alone, cross over this illusion.

Verily, this divine illusion of Mine, made up of the (three) qualities (of Nature) is difficult to cross over; those who take refuge in Me alone, cross over this illusion.

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