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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 3

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये | यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हजारों मनुष्योंमें कोई एक वास्तविक सिद्धिके लिये यत्न करता है और उन यत्न करनेवाले सिद्धोंमें कोई एक ही मुझे तत्त्वसे जानता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हजारों मनुष्योंमें कोई एक वास्तविक सिद्धिके लिये यत्न करता है और उन यत्न करनेवाले सिद्धोंमें कोई एक ही मुझे तत्त्वसे जानता है।

English Meaning

Among thousands of men, one perchance strives for perfection; even among those successful strivers, only one perchance knows Me in essence.

Among thousands of men, one perchance strives for perfection; even among those successful strivers, only one perchance knows Me in essence.

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