श्रीभगवानुवाच | मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः | असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु
अर्थ: श्रीभगवान् बोले -- हे पृथानन्दन! मुझमें आसक्त मनवाला, मेरे आश्रित होकर योगका अभ्यास करता हुआ तू मेरे समग्ररूपको निःसन्देह जैसा जानेगा, उसको सुन।
ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय | अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा
अपरा और परा -- इन दोनों प्रकृतियोंके संयोगसे ही सम्पूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, ऐसा तुम समझो। मैं सम्पूर्ण जगत् का प्रभव तथा प्रलय हूँ।
अपरा और परा -- इन दोनों प्रकृतियोंके संयोगसे ही सम्पूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, ऐसा तुम समझो। मैं सम्पूर्ण जगत् का प्रभव तथा प्रलय हूँ।
Know that these two (Natures) are the womb of all beings. So I am the source and dissolution of the whole universe.
Know that these two (Natures) are the womb of all beings. So I am the source and dissolution of the whole universe.
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