श्रीभगवानुवाच | मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः | असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु
अर्थ: श्रीभगवान् बोले -- हे पृथानन्दन! मुझमें आसक्त मनवाला, मेरे आश्रित होकर योगका अभ्यास करता हुआ तू मेरे समग्ररूपको निःसन्देह जैसा जानेगा, उसको सुन।
ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga
जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये | ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्
जरा (वृद्धावस्था) और मरण (मृत्यु) से मोक्ष पानेके लिये जो मेरा आश्रय लेकर प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्मको और सम्पूर्ण कर्मको भी जान जाते हैं।
जरा (वृद्धावस्था) और मरण (मृत्यु) से मोक्ष पानेके लिये जो मेरा आश्रय लेकर प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्मको और सम्पूर्ण कर्मको भी जान जाते हैं।
Those who strive for liberation from old age and death, taking refuge in Me, realise in full ï1thatï1 Brahman, the whole knowledge of the Self and all action.
Those who strive for liberation from old age and death, taking refuge in Me, realise in full ï1thatï1 Brahman, the whole knowledge of the Self and all action.
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