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प्रतिपदा तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(36)

प्रतिपदा तिथि से जुड़े 36 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

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प्रतिपदा श्राद्ध का फल क्या है?

प्रतिपदा श्राद्ध धन, यश, समृद्धि और मातृ ऋण मुक्ति देता है।

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नाना-नानी का श्राद्ध कब करें?

नाना-नानी के लिए प्रतिपदा श्राद्ध विशेष माना गया है।

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प्रतिपदा मृत्यु तिथि का नियम क्या है?

प्रतिपदा मृत्यु तिथि वाले पितर का श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा को होता है।

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प्रतिपदा को किसका श्राद्ध करें?

प्रतिपदा मृत्यु तिथि वाले पितरों और नाना-नानी का श्राद्ध करें।

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प्रतिपदा श्राद्ध किसके लिए है?

यह प्रतिपदा तिथि को दिवंगत पितरों और मातृ-पक्ष के लिए है।

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प्रतिपदा श्राद्ध कब करें?

प्रतिपदा मृत्यु तिथि वालों का श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा को करें।

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पड़वा श्राद्ध क्या होता है?

पड़वा श्राद्ध प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है।

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प्रतिपदा श्राद्ध क्या है?

पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध प्रतिपदा श्राद्ध है।

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प्रतिपदा और चतुर्थी श्राद्ध का मुख्य संदेश क्या है?

प्रतिपदा और चतुर्थी श्राद्ध पितृ तृप्ति, मातृकुल सम्मान, पितृदोष शांति और वंश कल्याण का मार्ग हैं।

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प्रतिपदा श्राद्ध की विधि क्या है?

प्रतिपदा श्राद्ध में तर्पण, पिण्डदान, पंचबलि और ब्राह्मण भोजन किया जाता है।

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प्रतिपदा श्राद्ध से क्या लाभ है?

प्रतिपदा श्राद्ध धन-धान्य, आयु, कीर्ति और मातृकुल का आशीर्वाद देता है।

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प्रतिपदा मातृकुल के लिए खास क्यों है?

प्रतिपदा नाना-नानी के श्राद्ध के लिए विशेष मानी गई है।

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मातामह श्राद्ध क्या है?

नाना-नानी के लिए किया जाने वाला श्राद्ध मातामह श्राद्ध है।

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नाना-नानी का श्राद्ध कब करें?

नाना-नानी के श्राद्ध के लिए प्रतिपदा तिथि विशेष मानी गई है।

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कृष्ण प्रतिपदा मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

कृष्ण प्रतिपदा मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा को करें।

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शुक्ल प्रतिपदा मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

शुक्ल प्रतिपदा मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा को करें।

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प्रतिपदा मृत्यु तिथि का नियम क्या है?

प्रतिपदा मृत्यु तिथि वाले पितर का श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा को होता है।

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प्रतिपदा को किसका श्राद्ध करें?

प्रतिपदा तिथि को दिवंगत पितरों और नाना-नानी का श्राद्ध करें।

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प्रतिपदा श्राद्ध किसके लिए होता है?

यह प्रतिपदा तिथि को दिवंगत पितरों और विशेष रूप से नाना-नानी के लिए किया जाता है।

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प्रतिपदा श्राद्ध कब किया जाता है?

प्रतिपदा श्राद्ध पितृ पक्ष की पहली तिथि को किया जाता है।

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प्रतिपदा श्राद्ध क्या है?

पितृ पक्ष के पहले दिन किया जाने वाला श्राद्ध प्रतिपदा श्राद्ध है।

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श्राद्ध फल

प्रतिपदा से अष्टमी तक के तिथि-फल क्या हैं?

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 के अनुसार तिथि-वार काम्य फल हैं — प्रतिपदा को उत्तम कन्या, द्वितीया को सुयोग्य दामाद और पशु-धन, तृतीया को अश्व यानी वाहन, चतुर्थी को क्षुद्र पशु, पञ्चमी को उत्तम पुत्र, षष्ठी को द्यूत यानी क्रीड़ा में विजय, सप्तमी को कृषि में सफलता, और अष्टमी को वाणिज्य यानी व्यापार में लाभ।

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श्राद्ध फल

प्रतिपदा को मातृकुल का श्राद्ध करने से क्या लाभ है?

प्रतिपदा को मातृकुल नाना-नानी का श्राद्ध करने से तीन प्रमुख लाभ मिलते हैं। पहला, घर में कभी क्लेश नहीं होता। दूसरा, पितृ दोष से सर्वथा मुक्ति। तीसरा, समृद्ध और शांतिपूर्ण जीवन। साथ ही घर में असीम सुख, शांति और सम्पन्नता का वास होता है। यह दो कुलों पितृकुल और मातृकुल के बीच आध्यात्मिक सेतु बनाता है।

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मातामह श्राद्ध

नाना-नानी की मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

नाना-नानी की मृत्यु तिथि याद न हो या किसी अन्य तिथि पर हुई हो — फिर भी श्राद्ध पितृ पक्ष की 'प्रतिपदा तिथि' को ही करें। यह प्रतिपदा का विशेष विशेषाधिकार है जो केवल मातृकुल को दिया गया है।

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प्रतिपदा श्राद्ध

क्या दुर्घटना से मरे व्यक्ति का श्राद्ध प्रतिपदा को होता है?

नहीं, दुर्घटना/अप्राकृतिक मृत्यु से मरे व्यक्ति का श्राद्ध प्रतिपदा को वर्जित है — चाहे उनकी मृत्यु प्रतिपदा को ही क्यों न हुई हो। उनका श्राद्ध केवल 'चतुर्दशी' (घट चतुर्दशी / घायल चतुर्दशी) को होता है। यह धर्मशास्त्र का कठोर और अलङ्घ्य नियम है।

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प्रतिपदा श्राद्ध

प्रतिपदा श्राद्ध करने से पितरों को क्या संदेश जाता है?

प्रतिपदा श्राद्ध करने से पितरों को दो संदेश मिलते हैं — (1) उनके वंशज उनके प्रति कृतज्ञ हैं (उन्हें भूले नहीं) (2) वंशजों ने पितृ पक्ष के प्रथम दिन ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन आरंभ कर दिया है (विलंब नहीं किया)।

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प्रतिपदा श्राद्ध

पितृ पक्ष की प्रतिपदा क्यों खास है?

पितृ पक्ष की प्रतिपदा खास है क्योंकि — (1) यह पक्ष का प्रथम दिन और श्राद्ध का प्रवेश द्वार है (2) पितरों के लिए अत्यंत पवित्र (3) वंशजों की कृतज्ञता का संदेश पितरों तक जाता है (4) प्रतिपदा को मरे पितरों का वार्षिक श्राद्ध (5) मातामह श्राद्ध (नाना-नानी) का अद्वितीय अधिकार इसी दिन।

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प्रतिपदा श्राद्ध

क्या प्रतिपदा सामान्यतः शुभ तिथि होती है?

सामान्य दिनों में प्रतिपदा तिथि अत्यंत शुभ या मंगलकारी कार्य (विवाह, गृह प्रवेश आदि) प्रारंभ करने के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। परंतु पितृ पक्ष की प्रतिपदा का परिप्रेक्ष्य पूर्णतः भिन्न = पितरों के सम्मान और पारलौकिक तृप्ति के लिए अत्यंत पवित्र तिथि।

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प्रतिपदा श्राद्ध

प्रतिपदा श्राद्ध किसका किया जाता है?

प्रतिपदा श्राद्ध उन मृत सदस्यों (पिता/माता/दादा/दादी आदि) का होता है जिनकी मृत्यु किसी भी मास के शुक्ल/कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) को स्वाभाविक रूप से हुई हो। अकाल मृत्यु वालों का इस दिन वर्जित — उनका चतुर्दशी को। मातामह (नाना-नानी) श्राद्ध भी इसी दिन।

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प्रतिपदा श्राद्ध

प्रतिपदा श्राद्ध को और किस नाम से जानते हैं?

प्रतिपदा श्राद्ध को 'पड़वा श्राद्ध' भी कहते हैं। दोनों नाम पर्यायवाची हैं। यह आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (पितृ पक्ष का पहला दिन) को किया जाने वाला श्राद्ध है।

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प्रतिपदा श्राद्ध

प्रतिपदा श्राद्ध क्या है?

प्रतिपदा श्राद्ध = पितृ पक्ष के पहले दिन (आश्विन कृष्ण प्रतिपदा) किया जाने वाला श्राद्ध। इसे 'पड़वा श्राद्ध' भी कहते हैं। प्रतिपदा को मरे पितरों का वार्षिक पार्वण श्राद्ध इसी दिन होता है। मातामह श्राद्ध की विशेषता इसी दिन है।

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देवी पूजन और आवाहन

नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि का पहला दिन (प्रतिपदा) = माँ शैलपुत्री को समर्पित। माता शैलपुत्री = हिमालय की पुत्री। वे मानव की आंतरिक शक्ति, दृढ़ता और प्रकृति की आदि-ऊर्जा की साक्षात् प्रतीक हैं।

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शुभ मुहूर्त

2026 में चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

2026 चैत्र नवरात्रि: 19 मार्च (गुरुवार)। सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा)। अभिजित मुहूर्त: 12:05 से 12:53। राहुकाल: 14:48 से 16:18 (वर्जित)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।

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शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना सुबह किस समय करनी चाहिए?

कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। 2026 में 19 मार्च: प्रातः 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा का संयोग)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।

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शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कैसे निकालें?

मुहूर्त के नियम (निर्णयसिन्धु): प्रतिपदा तिथि की व्याप्ति अनिवार्य। सर्वश्रेष्ठ = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। विकल्प = अभिजित मुहूर्त (मध्याह्न)। शुभ लग्न = द्विस्वभाव (मीन, मिथुन, कन्या, धनु)।

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त्योहार पूजा

नवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?

कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।

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आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
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