📖
विस्तृत उत्तर
प्रतिपदा श्राद्ध मातृकुल और पितृ पक्ष के शुभारंभ का प्रतीक है, जबकि चतुर्थी श्राद्ध विरोधियों के शमन, पितृदोष शांति और वंश वृद्धि से जुड़ा है। दोनों तिथियाँ बताती हैं कि श्रद्धा, तिल, कुशा, जल, मंत्र और पिण्डदान से पितरों को तृप्त कर गृहस्थ पितृ ऋण से उऋण होता है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?