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31 दिसंबर 2025

31 दिसंबर 2025 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

31 दिसंबर 2025 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल द्वादशी
नक्षत्र
कृत्तिका
योग
साध्य
करण
बव
वार
बुधवार
हिन्दू मास
पौष
ऋतु
हेमन्त
सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:35

31 दिसंबर 2025 के लिए प्रश्नोत्तर

बुधवार को कौन से काम शुभ?

बुधवार=बुध(बुद्धि/व्यापार)। सभी कार्य शुभ — व्यापार, दुकान, बैंक, शिक्षा, लेखन, संचार, गृहप्रवेश। कोई विशेष वर्जना नहीं।

गणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?

विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।

बुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?

बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।

द्वादशी को संन्यासी श्राद्ध क्यों?

द्वादशी विष्णु-प्रिय और यतियों के योग्य है।

यति महालय क्या होता है?

संन्यासियों का द्वादशी श्राद्ध।

संन्यासी का श्राद्ध किस दिन करें?

द्वादशी तिथि को।

संन्यासी का श्राद्ध एकादशी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी श्राद्ध द्वादशी को।

संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

द्वादशी तिथि को।

संन्यासी का श्राद्ध दशमी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी का श्राद्ध द्वादशी को।

संन्यासी का श्राद्ध कब करें?

संन्यासी का श्राद्ध एकादशी या द्वादशी को होता है।

यति का श्राद्ध कब होता है?

यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।

संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

संन्यासी (यति) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को किया जाता है। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित विशेष तिथि है।

संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी को क्यों किया जाता है?

संन्यासियों के श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि निर्धारित मानी गई है।

श्राद्ध द्वादशी को क्यों करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध वर्जित है, इसलिए श्राद्ध अगले दिन द्वादशी को किया जाना चाहिए।

एकादशी के दिन श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध करने से कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों को नरकगामी बताया गया है, इसलिए श्राद्ध द्वादशी को करना चाहिए।

भगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म कैसे हुआ?

कार्तिकेय जन्म: सामान्य तरीके से नहीं। भगवान शिव के तेज से → अग्निदेव और गंगाजी के माध्यम से → छह कृत्तिका नक्षत्रों (स्त्रियों) ने धारण किया → पार्वती ने छह बच्चों को एकाकार करके स्कंद को गोद में लिया।

एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें?

एकादशी पारण: द्वादशी को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में। पद्म पुराण: पारण में आँवला और बेर अवश्य खाएं — उच्छिष्ट दोष मिटता है। स्वतः गिरे तुलसी पत्ते का सेवन कर व्रत पूर्ण।

भगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव-पार्वती के मिलन का तेज → अग्नि ने धारण किया → गंगा में प्रवाहित → शरवण वन में 6 बालक → कृत्तिका कन्याओं ने पालन किया → पार्वती के आलिंगन से 6 बालक मिलकर षडानन (कार्तिकेय) बने → तारकासुर वध।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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