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20 फरवरी 2026

20 फरवरी 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

20 फरवरी 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल तृतीया
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपद
योग
साध्य
करण
गर
वार
शुक्रवार
हिन्दू मास
फाल्गुन
ऋतु
शिशिर
सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
18:15

20 फरवरी 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

शुक्रवार को सफेद वस्तुएं दान करने का क्या महत्व है?

शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन है, सफेद रंग शुक्र का कारक है। सफेद वस्तुओं (चावल, दूध, वस्त्र, मिश्री) का दान करने से शुक्र मजबूत होता है — वैवाहिक सुख, सौंदर्य और भौतिक समृद्धि बढ़ती है।

शुक्रवार को कौन से काम शुभ?

शुक्रवार=शुक्र(लक्ष्मी/सौंदर्य)। खरीदारी, वाहन, कपड़े, आभूषण, कला, गृहप्रवेश। संतोषी/लक्ष्मी पूजा। खट्टा वर्जित(व्रत)।

राम जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

राम पूजा के लिए — मंगलवार (हनुमान के साथ), रामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी, जन्म-दिवस) सर्वोत्तम। नित्य राम-नाम जप में कोई भी दिन उत्तम है। शनिवार को हनुमान-राम पूजन शनि-पीड़ा निवारण के लिए विशेष।

वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि और कथा क्या है?

11/21 शुक्रवार। संध्या पूजा, कमल, घी दीपक। व्रत कथा सुनें। खीर भोग। कथा पुस्तक दूसरी को दें। कथा: निर्धन→व्रत→धन; अपमान→दरिद्रता; पुनः व्रत→सुख। लोक परंपरा।

शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करने का विशेष विधान क्या है?

शुक्रवार = लक्ष्मी दिन। सफेद/गुलाबी वस्त्र, कमल, कुमकुम, घी दीपक। श्री सूक्त / चालीसा + 108 जप। खीर भोग। व्रत: निराहार/फलाहार, सफेद वस्तु दान। संध्या तुलसी दीपक।

संतोषी माता व्रत कथा और पूजा विधि क्या है?

16 शुक्रवार व्रत। भोग: गुड़+चना। खट्टा सर्वथा वर्जित (खाना+खिलाना)। एक समय भोजन। व्रत कथा+आरती। उद्यापन: 8 बालकों को भोजन। कथा: छोटी बहू → माता दर्शन → व्रत → सुख-समृद्धि। पुराणों में स्पष्ट उल्लेख नहीं — लोक परंपरा आधारित।

युगादि तिथि क्या होती है?

जिस तिथि को युगारंभ से जोड़ा जाए, वह युगादि तिथि कही जाती है।

तृतीया श्राद्ध वरार्थिनी क्यों है?

तृतीया तिथि वरदान देने वाली मानी गई है, इसलिए वरार्थिनी है।

मार्कण्डेय पुराण में तृतीया श्राद्ध क्या है?

मार्कण्डेय पुराण तृतीया को वरदान देने वाली तिथि कहता है।

कमला देवी की पूजा कब और कैसे करते हैं?

कमला पूजा का समय: प्रत्येक शुक्रवार + दीपावली अमावस्या। धनतेरस से दीपावली तक लक्ष्मी-कुबेर पूजन। ब्रह्म मुहूर्त = शुभ समय।

माँ त्रिपुर सुंदरी की साधना कब करनी चाहिए?

माँ त्रिपुर सुंदरी साधना का शुभ काल: शुक्रवार = विशेष शुभ। गुप्त नवरात्रि और पूर्णिमा भी उपयुक्त। अन्य शुभ तिथियों पर भी साधना की जा सकती है।

माँ बगलामुखी की साधना कब करनी चाहिए?

बगलामुखी साधना का शुभ काल: गुप्त नवरात्रि में विशेष शुभ। यंत्र स्थापना = शुक्रवार। साधना का उत्तम समय = रात्रि 9 से 12 बजे के बीच।

वसंत पंचमी 2026 में कब है?

वसंत पंचमी 2026: 23 जनवरी, शुक्रवार। पंचमी तिथि: 23 जनवरी 02:28 से 24 जनवरी 01:46 तक। पूजा का शास्त्रसम्मत मुहूर्त: प्रातः 07:15 से दोपहर 12:50 तक।

संतोषी माता का व्रत किस दिन करते हैं?

संतोषी माता का व्रत शुक्रवार के दिन किया जाता है, क्योंकि यह दिन शुक्र ग्रह से जुड़ा है जो सुख, शांति और माधुर्य का प्रतीक है।

श्रीसूक्त का पाठ शुक्रवार को क्यों?

शुक्रवार का स्वामी शुक्र ग्रह है जो धन, ऐश्वर्य और सुख का कारक है — माता लक्ष्मी के स्वरूप से सीधा सम्बन्ध। इसलिए श्रीसूक्त का पाठ शुक्रवार को विशेष फलदायी है। नित्य पाठ से दरिद्रता नष्ट होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

शुक्रवार को कौन सा रंग शुभ है

शुक्रवार = सफेद/गुलाबी (शुक्र ग्रह)। सौंदर्य, प्रेम, दांपत्य सुख। लक्ष्मी/देवी पूजा। हीरा रत्न। ज्योतिष परंपरा।

महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें?

महाशिवरात्रि में रात को चार प्रहर की पूजा करें — प्रथम प्रहर दूध, द्वितीय दही, तृतीय घी, चतुर्थ शहद से अभिषेक। प्रत्येक प्रहर बेलपत्र, 'ॐ नमः शिवाय' जप और आरती। पूरी रात जागरण। अगले दिन प्रातः पारण।

लक्ष्मी मंत्र जप का समय क्या है?

लक्ष्मी मंत्र जप के लिए ब्रह्ममुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) सर्वश्रेष्ठ हैं। शुक्रवार को जप का फल सात गुना अधिक है। शरद पूर्णिमा, दीपावली और अक्षय तृतीया वार्षिक विशेष समय हैं।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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