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30 मार्च 2026

30 मार्च 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

30 मार्च 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल द्वादशी
नक्षत्र
मघा
योग
शूल
करण
बालव
वार
सोमवार
हिन्दू मास
चैत्र
ऋतु
वसन्त
सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:38

आज के पर्व

सोम

30 मार्च 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

बरगद पेड़ की पूजा — वट सावित्री व्रत में?

वट सावित्री=ज्येष्ठ अमावस्या(पति दीर्घायु)। बरगद पर जल+दूध+रोली→मौली बांधें→7 परिक्रमा→कथा सुनें→व्रत। सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस लिए। बरगद=अमरत्व।

एकादशी को कौन से काम न करें?

एकादशी=विष्णु व्रत। न करें: अन्न(चावल विशेष), मांस, दिन सोना, क्रोध, झूठ। करें: विष्णु पूजा, गीता, व्रत, जप, दान। उपवास+भक्ति दिन।

शिव व्रत रखकर यदि टूट जाए तो प्रायश्चित्त क्या है?

क्षमा प्रार्थना + क्षमापन स्तोत्र। अगले सोमवार/शिवरात्रि पर व्रत। रुद्राभिषेक, 108 महामृत्युंजय, गरीबों को भोजन दान। व्रत भंग = पाप नहीं — शिव दंडित नहीं करते, भक्ति जारी रखें।

पूर्णिमा को कौन से काम शुभ?

पूर्णिमा=पूर्ण चंद्र। शुभ: सत्यनारायण, व्रत, दान, पूजा, गंगा स्नान, तीर्थ। गृहप्रवेश/विवाह कुछ में वर्जित। भक्ति+दान+साधना दिन।

मंत्र जप में एकादशी का क्या विशेष महत्व है?

विष्णु तिथि — विष्णु/कृष्ण जप सर्वोत्तम। उपवास+जप = द्विगुणित। सात्विक ऊर्जा। निर्जला = सबसे शक्तिशाली। 11 = एकादश रुद्र/सिद्धि।

संकट चतुर्थी व्रत की विधि और कथा क्या है?

कृष्ण पक्ष चतुर्थी (मासिक)। संध्या पूजा, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, कथा श्रवण। चंद्रोदय बाद पारण। कथा: ब्राह्मण→व्रत→संकट दूर। माघ चतुर्थी सर्वश्रेष्ठ।

सावन में शिव की संध्या पूजा की विशेष विधि क्या है?

प्रदोष काल (सूर्यास्त ±1.5 घंटे)। जलाभिषेक → बेलपत्र → धूप-दीपक → रुद्राष्टक/चालीसा → आरती → भोग → कथा। स्कन्द पुराण: प्रदोष = शिव तांडव — सबसे प्रसन्न काल।

शिव की पूजा में प्रदोष काल और निशीथ काल में क्या अंतर है?

प्रदोष: संध्या (सूर्यास्त ±1.5 घंटे) — शिव तांडव, त्रयोदशी व्रत, नियमित। निशीथ: मध्यरात्रि (~12-1 AM) — महाशिवरात्रि मुख्य पूजा, निराकार दर्शन, गहन साधना। प्रदोष = सरल/मासिक; निशीथ = गहन/वार्षिक।

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में पूजा का क्या अंतर है?

चैत्र: वसंत, नववर्ष, सौम्य देवी, राम नवमी। शारदीय: शरद, उग्र देवी, दशहरा/रावण दहन, बंगाल दुर्गा पूजा। पूजा विधि समान — घटस्थापना, 9 दिन, सप्तशती।

शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किस समय करना सबसे प्रभावी है?

सर्वोत्तम: प्रदोष काल (संध्या) — शिव स्वयं तांडव करते हैं। महाशिवरात्रि रात्रि, सावन सोमवार, सोम प्रदोष पर विशेष। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य। लाभ: शत्रु नाश, आत्मबल, कानूनी विजय, नकारात्मकता रक्षा। दैनिक 1-3-11 बार।

रुद्राभिषेक कराने का सबसे उत्तम दिन कौन सा होता है?

सर्वोत्तम: सावन का सोमवार और महाशिवरात्रि। फिर: सोम प्रदोष (सोमवार + त्रयोदशी) > मासिक शिवरात्रि > प्रत्येक सोमवार। किसी भी दिन किया जा सकता है, पर ऊपर बताए गए अवसर विशेष फलदायी।

चंद्र देव की पूजा कैसे करें?

सोमवार शाम/रात, चंद्र दर्शन, सफ़ेद फूल+दूध। 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे' 108। चावल/दूध/चांदी दान। पूर्णिमा सर्वोत्तम। मोती(ज्योतिषी)। शांति/नींद/माता सुख।

शिवलिंग पर रात को पूजा करना शुभ है या अशुभ?

रात्रि पूजा अत्यंत शुभ। महाशिवरात्रि: चार प्रहर रात्रि पूजा सर्वश्रेष्ठ (शिव पुराण)। प्रदोष काल (संध्या): शिव पूजा का श्रेष्ठ समय (स्कन्द पुराण)। शिव = महाकाल, समय से परे। प्रातःकाल नियमित पूजा, रात्रि विशेष अवसरों पर — दोनों शुभ।

व्रत उपवास के वैज्ञानिक लाभ?

Autophagy(Nobel 2016): 12-16hr उपवास=कोशिका सफाई। इंसुलिन/Diabetes सुधार, Fat burning, Brain BDNF, हृदय, Longevity। एकादशी(15 दिन)=5000 वर्ष पहले वही=Nobel 2016। Diabetes/गर्भवती=डॉक्टर।

श्रावण मास में सोमवार व्रत कैसे रखें, विधि सहित?

सूर्योदय पूर्व स्नान → संकल्प → जलाभिषेक → पंचामृत → बेलपत्र → 108 जप → स्तोत्र → कर्पूर आरती। निराहार/फलाहार (अन्न-नमक वर्जित)। ब्रह्मचर्य। संध्या पूजा + कथा। सभी सोमवार व्रत — अधूरा अशुभ।

अविवाहित लड़की सोमवार व्रत रख सकती क्या?

हाँ — विशेष शुभ। 16 सोमवार=अच्छा वर। पार्वती ने शिव हेतु व्रत किया। श्रावण सोमवार विशेष। शिवलिंग स्पर्श=परंपरा भिन्न (शास्त्रीय निषेध नहीं)। शिव=अर्धनारीश्वर।

महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि की पूजा में क्या अंतर है?

मासिक: हर माह कृष्ण चतुर्दशी, सामान्य पूजा, व्रत वैकल्पिक, जागरण नहीं। महाशिवरात्रि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (वर्ष में 1 बार), विस्तृत 4 प्रहर पूजा, व्रत + जागरण अनिवार्य, अनंत गुना फल। महाशिवरात्रि = महापर्व।

वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि और कथा क्या है?

11/21 शुक्रवार। संध्या पूजा, कमल, घी दीपक। व्रत कथा सुनें। खीर भोग। कथा पुस्तक दूसरी को दें। कथा: निर्धन→व्रत→धन; अपमान→दरिद्रता; पुनः व्रत→सुख। लोक परंपरा।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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