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9 मई 2026

9 मई 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

9 मई 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण सप्तमी
नक्षत्र
श्रवण
योग
शुक्ल
करण
बव
वार
शनिवार
हिन्दू मास
ज्येष्ठ
ऋतु
ग्रीष्म
सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
19:01

9 मई 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

दुर्गा पूजा में सप्तमी अष्टमी नवमी का क्या विशेष महत्व है?

सप्तमी: नबपत्रिका, प्राण प्रतिष्ठा, नेत्रोन्मीलन। अष्टमी: संधि पूजा (108 दीपक), कुमारी पूजा = सर्वशक्तिशाली। नवमी: हवन/पूर्णाहुति, कन्या पूजन, वरदान।

शनिवार को हनुमान जी को तेल-सिंदूर चढ़ाने का विधान?

कथा: हनुमान जी ने राम की आयु बढ़ाने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया। विधि: नारंगी सिंदूर+चमेली तेल, दाहिने कंधे का तिलक। मंगल/शनिवार। शनि ने वचन दिया — हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं।

शनि शांति के लिए शनिवार उपाय?

पीपल तेल दीपक+परिक्रमा, 'ॐ शं शनैश्चराय' 108, तिल/तेल/लोहा/कंबल दान, छाया दान, कौवा रोटी, गरीब सेवा, शनि चालीसा। ईमानदारी+मेहनत+सेवा=सबसे बड़ा उपाय।

शनिवार को लोहे की चीजें खरीदना शुभ है या अशुभ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ है — लोहा शनिदेव का कारक है। शनिवार को लोहे का दान करना शुभ है। बाध्यता में खरीदें तो तुरंत घर अंदर न लाएँ। इस विषय पर मत भिन्नता है।

मंदिर में स्नान यात्रा क्या होती है?

ज्येष्ठ पूर्णिमा (पुरी) — 108 कलश अभिषेक (सार्वजनिक)। बाद: 15 दिन एकांत ('बीमार') → नव यौवन → रथ यात्रा! जगन्नाथ विशेष।

गीता का सातवां अध्याय क्यों पढ़ें?

सप्तमी पर गीता का सातवाँ अध्याय विशेष फलदायी माना गया है।

कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त श्राद्ध का श्रेष्ठ अष्टम मुहूर्त है।

नारद संहिता में सप्तमी का क्या महत्व है?

नारद संहिता सप्तमी को पितृकल्याण योग से जोड़ती है।

पितृकल्याण योग क्या है?

सप्तमी, अष्टमी और नवमी का पितृ पूजन पितृकल्याण योग है।

सप्तमातृका क्या हैं?

सप्तमातृका सात दिव्य माताएँ हैं।

सूर्य देव सप्तमी से कैसे जुड़े हैं?

सप्तमी सूर्य की तिथि मानी गई है।

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था कैसे काम करती है?

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था श्रवण-श्रवणी देवों से चलती है, जो हर गुप्त कर्म देखकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

प्रेतकल्प का श्रवण किसे नहीं करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण किसी के लिए भी पूर्णतः वर्जित नहीं। 'घर में न रखने' की धारणा भ्रामक है। परंपरागत सावधानी — गर्भवती, अबोध बच्चे और अत्यंत संवेदनशील व्यक्तियों को विस्तृत यातना-वर्णन से दूर रखा जा सकता है।

प्रेतकल्प का श्रवण किस उद्देश्य से किया जाता है?

प्रेतकल्प श्रवण के उद्देश्य — मृत आत्मा की सद्गति, परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान, मृत्यु की सच्चाई समझना, पाप-मोचन और वैराग्य-आत्मज्ञान की प्राप्ति।

प्रेतकल्प का श्रवण क्यों करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — पापों से मुक्ति, मृत आत्मा को सद्गति, विष्णु-प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति, प्रेतत्व से बचाव और परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान के लिए।

शनिवार को लोहे की वस्तु खरीदना शुभ है या अशुभ?

शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ माना जाता है क्योंकि लोहा शनिदेव की धातु है और इससे उनकी नाराजगी का भय रहता है। लोहा दान करना शुभ है — खरीदना वर्जित।

भगवान हमारी प्रार्थना कैसे सुनते हैं

भगवान अंतर्यामी हैं — हर हृदय में निवास करते हैं। प्रार्थना सीधे उन तक पहुँचती है। उनका उत्तर मन में शांति, स्पष्ट विचार, परिस्थिति में बदलाव या गुरु-संत के माध्यम से आता है।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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