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4 जुलाई 2026

4 जुलाई 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

4 जुलाई 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण चतुर्थी
नक्षत्र
धनिष्ठा
योग
प्रीति
करण
बालव
वार
शनिवार
हिन्दू मास
आषाढ़
ऋतु
ग्रीष्म
सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
19:23

4 जुलाई 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

शनिवार को हनुमान जी को तेल-सिंदूर चढ़ाने का विधान?

कथा: हनुमान जी ने राम की आयु बढ़ाने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया। विधि: नारंगी सिंदूर+चमेली तेल, दाहिने कंधे का तिलक। मंगल/शनिवार। शनि ने वचन दिया — हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं।

शनि शांति के लिए शनिवार उपाय?

पीपल तेल दीपक+परिक्रमा, 'ॐ शं शनैश्चराय' 108, तिल/तेल/लोहा/कंबल दान, छाया दान, कौवा रोटी, गरीब सेवा, शनि चालीसा। ईमानदारी+मेहनत+सेवा=सबसे बड़ा उपाय।

शनिवार को लोहे की चीजें खरीदना शुभ है या अशुभ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ है — लोहा शनिदेव का कारक है। शनिवार को लोहे का दान करना शुभ है। बाध्यता में खरीदें तो तुरंत घर अंदर न लाएँ। इस विषय पर मत भिन्नता है।

चौथ भरणी क्या होती है?

चतुर्थी पर भरणी नक्षत्र का श्राद्ध चौथ भरणी कहलाता है।

तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

कैलाश वास तिथि पर रुद्राभिषेक करने से क्या होता है?

कैलाश वास तिथि (चतुर्थी, एकादशी, पंचमी, द्वादशी) पर रुद्राभिषेक करने से मनोकामना सिद्धि, सुख-समृद्धि और आनंद वृद्धि होती है — यह शुभ तिथि मानी जाती है।

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब होता है?

यह व्रत हर हिंदू महीने के 'कृष्ण पक्ष' (अंधेरे पखवाड़े) की चतुर्थी (चौथी) तिथि को रखा जाता है।

शनिवार को लोहे की वस्तु खरीदना शुभ है या अशुभ?

शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ माना जाता है क्योंकि लोहा शनिदेव की धातु है और इससे उनकी नाराजगी का भय रहता है। लोहा दान करना शुभ है — खरीदना वर्जित।

शनिवार को क्या चीजें नहीं खरीदनी चाहिए

लोक मान्यता: शनिवार को लोहा/स्टील, काले कपड़े, तेल, नमक, चाकू, झाड़ू न खरीदें। दान करें: सरसों तेल, काले कपड़े। पूर्णतः ज्योतिषीय/लोक परंपरा — वैदिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख नहीं।

शनिवार को काला पहनना शुभ है या अशुभ

ज्योतिष: शनिवार काला/नीला = शुभ (शनि प्रसन्नता, दोष शमन)। कुछ लोक मान्यता: काला = अशुभ। प्रचलित मत: शनिवार काला शुभ। शनि उपाय: सरसों तेल/उड़द दान, हनुमान पूजा।

मंगलवार शनिवार को बाल कटवाना चाहिए या नहीं

लोक मान्यता: मंगलवार/शनिवार/गुरुवार बाल कटवाना अशुभ। शुभ: सोमवार/बुधवार/शुक्रवार। किसी शास्त्रीय ग्रंथ में उल्लेख नहीं — पूर्णतः लोक परंपरा। आवश्यकता अनुसार कटवा सकते हैं।

गुरु पूर्णिमा पर गुरु दक्षिणा में क्या देनी चाहिए

गुरु दक्षिणा: यथाशक्ति धन (₹101/501/1001), वस्त्र, फल-मिठाई, पुस्तकें, गौदान, स्वर्ण। सर्वोत्तम = गुरु सेवा + आज्ञा पालन + शिक्षा अभ्यास। 'विना दक्षिणा विद्या निष्फल'। राशि गौण, कृतज्ञता प्रधान।

गुप्त नवरात्रि में तंत्र साधना क्यों विशेष प्रभावी मानी जाती है?

गुप्त नवरात्रि तंत्र: 'गुप्त' शक्ति=तीव्र (भूमिगत नदी जैसी), ब्रह्माण्डीय शक्तिपात काल, दश महाविद्या सर्वोत्तम, एकांत=गहन, मंत्र सिद्धि शीघ्र (कुलार्णव), ऋतु सन्धि=ऊर्जा तीव्र। गुरु दीक्षा अनिवार्य। सामान्य=सप्तशती/नवार्ण सुरक्षित।

गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा कैसे करें

गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा = व्यास जन्मदिन। गुरु/व्यास पादुका पूजा → 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' जप → गुरु गीता पाठ → चरण स्पर्श → दक्षिणा → विद्वान भोजन। गुरु = ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप।

संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे रखें

संकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष चतुर्थी, गणेश व्रत। प्रातः स्नान → संकल्प → दिनभर उपवास → सायं गणेश पूजा (दूर्वा, मोदक, लाल फूल) → 'ॐ गं गणपतये नमः' 108 बार → चन्द्रोदय पर चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → तभी पारण। मंगलवार = अंगारकी (अत्यन्त शुभ)।

पीपल पर जल चढ़ाने का शनिवार को क्या महत्व है

शनिवार को पीपल पर शनि की छाया मानी गई है। शनि साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा में यह उपाय अत्यन्त लाभकारी है। स्टील/पीतल के लोटे से काली तिल मिला जल चढ़ाएँ, 'ॐ शं शनिश्चराय नमः' जप करें, 7-11 परिक्रमा करें। तांबे का लोटा वर्जित। शनि कृपा, ग्रह शान्ति, आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।

पीपल के पेड़ की पूजा कैसे करें?

पीपल पूजा: शनिवार सर्वोत्तम। विधि: स्नान → जड़ में जल → रोली-अक्षत → कलावा बाँधें → सरसों तेल दीपक → 7+ परिक्रमा → 'मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णुः...' मंत्र → प्रणाम। त्रिमूर्ति वास (जड़-ब्रह्मा, तना-विष्णु, शाखा-शिव)। बुधवार-रविवार जल वर्जित। कभी न काटें।

मंदिर में सुंदरकांड पाठ करवाने का क्या नियम है?

सुंदरकांड नियम: मंगलवार/शनिवार सायंकाल। विधि: स्नान → लाल/केसरिया वस्त्र → हनुमान चालीसा → सम्पूर्ण सुंदरकांड → हनुमान चालीसा → आरती → प्रसाद। विशेष: 7/11/21/40 दिन निरंतर। बीच में न उठें, मोबाइल बन्द। फल: संकट मुक्ति, शनि शान्ति, शत्रु विजय, बाधा निवारण।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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