श्री राधा नाम मंत्र
किशोरी जी
नित्य यौवन, मानसिक शुद्धता, विचारों की पवित्रता एवं ब्रज-रस की अनुभूति।
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यह मंत्र क्यों?
नित्य यौवन, मानसिक शुद्धता, विचारों की पवित्रता एवं ब्रज-रस की अनुभूति।
इस मंत्र से क्या होगा?
नित्य यौवन, मानसिक शुद्धता, विचारों की पवित्रता एवं ब्रज-रस की अनुभूति
जाप विधि
नेत्रों में किशोर रूप का ध्यान करते हुए मानसिक स्मरण।
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ॐ भम भैरवाय नमस्तुभ्यम कपाले कृपणाय चंड मुंड विनाशाय वीरभद्र स्वरूपण सर्वत्र प्रभ देव रक्षक सुरा त्रोक्य विजय संभो नमस्ते काल रूपण ओम छम काल भैरवाय क्रूर रूपाय विकिरण मूर्धने श्री नेत्राय खग धणे दुर्जया भय हराय सर्व शत्रु संारकाय स्वाहा
siddh mantraॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
gyan mantraसरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने । विश्वरूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ॥
navgrah mantraॐ क्रीं क्रीं हूं हूं टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥