श्री राधा नाम मंत्र
किशोरी जी
नित्य यौवन, मानसिक शुद्धता, विचारों की पवित्रता एवं ब्रज-रस की अनुभूति।
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यह मंत्र क्यों?
नित्य यौवन, मानसिक शुद्धता, विचारों की पवित्रता एवं ब्रज-रस की अनुभूति।
इस मंत्र से क्या होगा?
नित्य यौवन, मानसिक शुद्धता, विचारों की पवित्रता एवं ब्रज-रस की अनुभूति
जाप विधि
नेत्रों में किशोर रूप का ध्यान करते हुए मानसिक स्मरण।
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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
jap mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
beej mantraह्रीं हुं
dhyan mantraॐ
ugra mantraअं ङं ञं णं नं मं
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥