भगवान विष्णु नाम मंत्र
त्रिविक्रम
तीनों लोकों में विजय, निर्बाध यात्रा, हर दिशा में सफलता एवं सीमाओं का विस्तार।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तीनों लोकों में विजय, निर्बाध यात्रा, हर दिशा में सफलता एवं सीमाओं का विस्तार।
इस मंत्र से क्या होगा?
तीनों लोकों में विजय, निर्बाध यात्रा, हर दिशा में सफलता एवं सीमाओं का विस्तार
जाप विधि
किसी नई यात्रा या नवीन व्यापारिक कार्य का आरंभ करते समय मानसिक जप।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ यन्मे गर्भे वसतः पापमुग्रं यज्जायमानस्य च किंचिदन्यत् । तत्पवमानः पवित्रेण पुनातु ॥
gyan mantraज्ञानम् आनंद मयं देवं निर्मल स्पटिकाकृतिम् । आधारं सर्व विद्यानां हयग्रीवं उपास्मे ॥
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
bhakti mantraगोपाला गोपाला देवकीनन्दन गोपाला
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