गुरु भक्तिदत्तात्रेय मंत्र का जप गुरु कृपा के लिए कैसे करें?दत्तात्रेय = त्रिमूर्ति अवतार, आदि गुरु। 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' 108। गुरुवार, दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)। रुद्राक्ष, औदुंबर (गूलर) वृक्ष नीचे। 24 गुरु (प्रकृति)। गुरु कृपा/ज्ञान/मार्गदर्शन। महाराष्ट्र/कर्नाटक प्रचलित।
त्रिमूर्ति में स्थानशैव दर्शन के अनुसार विष्णु की उत्पत्ति कैसे हुई?शैव दर्शन: सदाशिव (निराकार परब्रह्म) → प्रकृति (शिवा/दुर्गा) प्रकट → शिवलोक की रचना → सदाशिव के वाम अंग से विष्णु → विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा। इस मत में शिव सर्वोपरि, विष्णु उनके पालनहार स्वरूप।#शैव दर्शन#सदाशिव#विष्णु उत्पत्ति
त्रिमूर्ति में स्थानवैष्णव दर्शन के अनुसार सृष्टि का आरंभ कैसे हुआ?वैष्णव दर्शन: प्रलयकाल में नारायण क्षीरसागर में योगनिद्रा में → सृष्टि की इच्छा → नाभि कमल से ब्रह्मा उत्पन्न → ब्रह्मा के क्रोध-संतप्त ललाट से रुद्र (शिव) उत्पन्न। विष्णु ही मूल आधार जिससे ब्रह्मा और शिव की उत्पत्ति हुई।#वैष्णव दर्शन#नारायण#नाभि कमल
देवता पूजादत्तात्रेय पूजा कैसे करेंब्रह्मा-विष्णु-महेश संयुक्त अवतार। अत्रि-अनसूया पुत्र। गुरुवार/दत्त जयंती। 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः' 108 बार। गुरुचरित्र पाठ। 24 गुरु बनाए। गुरु प्राप्ति और ज्ञान हेतु। औदुंबर वृक्ष विशेष।#दत्तात्रेय#पूजा#विधि
देवता पूजादत्तात्रेय 24 गुरु कैसे बनाएभागवत 11वां स्कंध। पृथ्वी (धैर्य), वायु (निर्लिप्तता), आकाश (विशालता), जल (निर्मलता), अग्नि (शुद्धता), सूर्य (दान), मधुमक्खी (संग्रह दोष), मकड़ी (रचना में फंसना) आदि 24। प्रकृति सबसे बड़ा गुरु।#दत्तात्रेय#24 गुरु#शिक्षा