धर्म और आचारआचार्य कैसा होना चाहिए?आचार्य वृद्ध, निलोभी, जितेन्द्रिय, दम्भरहित, विनम्र और सरल स्वभाव वाला होना चाहिए।#आचार्य#वृद्ध#निलोभी
धर्म और आचारधर्म से अभीष्ट फल कैसे मिलता है?आचार्य लोग जिस कर्म से अभीष्ट फल की प्राप्ति हो उसे धर्म और जिससे अनिष्ट मिले उसे अधर्म कहते हैं।#धर्म#अभीष्ट फल#अनिष्ट फल
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह के बाद दान किसे दें?समाप्ति पर ब्राह्मणों और याचकों को धन-अन्न दें; सामर्थ्य हो तो हवन सामग्री, गौ-सुवर्ण और भागवत पुस्तक आचार्य को दें।#दान#भागवत सप्ताह#ब्राह्मण
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में गुरु का महत्व क्या है?उपनिषदों में गुरु अनिवार्य है। मुण्डकोपनिषद (1/2/12) में श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ गुरु के पास जाने का आदेश है। छान्दोग्य (6/14/2) में गुरु 'अंधे को मार्ग दिखाने वाला' है। श्वेताश्वतर (6/23) — ईश्वर और गुरु में समान भक्ति से ही उपनिषद-ज्ञान प्रकट होता है।#गुरु#उपनिषद#आचार्य
वेद ज्ञानवेदों में गुरु का महत्व क्या है?वेदों में गुरु अनिवार्य है। मुण्डकोपनिषद (1/2/12) — श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ गुरु के बिना ब्रह्मज्ञान संभव नहीं। तैत्तिरीय उपनिषद (1/11) — 'आचार्यो ब्रह्म भवति' — गुरु स्वयं ब्रह्म है।#गुरु#वेद#गुरु-शिष्य