देवी-देवता परिचयराधा रानी की उत्पत्ति कैसे हुई?पद्म पुराण के अनुसार राधा गोप राजा वृषभानु और माता कीर्ति की पुत्री थीं और भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को प्रकट हुईं। ब्रह्मवैवर्त पुराण में वे कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति और लक्ष्मी का अवतार बताई गई हैं। महाभारत और भागवत में उनका स्पष्ट उल्लेख नहीं है।#राधा रानी#राधा जन्म#ब्रह्मवैवर्त पुराण
लोकएकादशी श्राद्ध में ब्रह्मवैवर्त पुराण का मत क्या है?एकादशी पर अन्न-श्राद्ध निषिद्ध है।#ब्रह्मवैवर्त पुराण#अन्न निषेध#एकादशी
सरस्वती प्राकट्यब्रह्मवैवर्त पुराण में सरस्वती का प्राकट्य कैसे बताया है?ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खण्ड, अध्याय 4-5): मूल प्रकृति पांच स्वरूपों में विभक्त (दुर्गा, राधा, लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री)। देवी सरस्वती = श्रीकृष्ण के कंठ/ओष्ठ से प्राकट्य। श्रीकृष्ण ने ही प्रथम आराधना की और उद्घोष किया: माघ शुक्ल पंचमी को सभी षोडशोपचार से उपासना करें।#ब्रह्मवैवर्त पुराण#पंच प्रकृति#श्रीकृष्ण कंठ
कार्तिकेय और गणेश जन्मब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?ब्रह्मवैवर्त पुराण: पार्वती का 'पुण्यक व्रत' → विष्णु शिशु रूप में अवतरित → शनि की दृष्टि से मस्तक भस्म → विष्णु गरुड़ पर गजराज का मस्तक लाए।#गणेश जन्म#ब्रह्मवैवर्त पुराण#पुण्यक व्रत
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुतिब्रह्मवैवर्त पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?ब्रह्मवैवर्त पुराण: एक बार भी विधिपूर्वक पारद शिवलिंग का पूजन करने वाला जब तक सूर्य-चंद्र हैं तब तक पूर्ण सुख पाता है और अंततः मोक्ष प्राप्त करता है।#ब्रह्मवैवर्त पुराण#एक बार पूजन#सूर्य चंद्र
नियम और वर्जनाएंशनि देव की आँखों में देखकर दर्शन क्यों नहीं करने चाहिए? (दृष्टि दोष)ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शनि की दृष्टि में विनाशकारी शक्ति होती है (जिससे गणेश जी का सिर कटा था)। इसलिए उनकी आँखों में आँखें डालकर नहीं, बल्कि हमेशा उनके चरणों के दर्शन करने चाहिए।#दृष्टि दोष#दर्शन नियम#ब्रह्मवैवर्त पुराण
गणेश कथाशनि की दृष्टि से गणेश जी का सिर कैसे जला?यह कथा मुख्यतः ब्रह्मवैवर्त पुराण में है। शनिदेव की पत्नी ने उन्हें श्राप दिया था कि उनकी दृष्टि से अनिष्ट होगा। पार्वती के आग्रह पर जब शनि ने गणेश को देखा तो उनका सिर धड़ से अलग हो गया। बाद में हाथी का सिर जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया गया।#शनि दृष्टि#गणेश सिर#ब्रह्मवैवर्त पुराण