विस्तृत उत्तर
ब्रह्मवैवर्त पुराण' के प्रकृति खण्ड (अध्याय 4 एवं 5) में महर्षि नारायण द्वारा देवर्षि नारद को दिए गए उपदेश के अनुसार, संपूर्ण सृष्टि का संचालन भगवान श्रीकृष्ण (परम पुरुष) और उनकी 'मूल प्रकृति' द्वारा होता है।
यह मूल प्रकृति सृजन के उद्देश्य से पांच स्वरूपों (पंच प्रकृति) में विभक्त हुई—दुर्गा, राधा, लक्ष्मी, सरस्वती और सावित्री।
देवी सरस्वती का प्राकट्य भगवान श्रीकृष्ण के कंठ/ओष्ठ से हुआ। श्रीकृष्ण ने ही सर्वप्रथम देवी सरस्वती की आराधना की और यह उद्घोष किया कि माघ शुक्ल पंचमी के दिन संपूर्ण ब्रह्मांड—मनुष्य, देवता, गंधर्व, मुनि, सिद्ध और नाग—ज्ञान और प्रज्ञा की प्राप्ति के लिए पारंपरिक षोडशोपचार विधि से देवी की उपासना करेंगे।
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