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विस्तृत उत्तर
ब्रह्म पुराण' के अनुसार, जब सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की, तो चारों ओर एक नीरसता और पूर्ण निस्तब्धता (Silence) व्याप्त थी। इस मौन को भंग करने और सृष्टि में नाद (Sound) एवं लय उत्पन्न करने के उद्देश्य से, ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से पवित्र जल का छिड़काव किया।
उस दिव्य ऊर्जा से एक चतुर्भुजी, श्वेतवर्णा, हाथों में वीणा लिए हुए देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ। उन्होंने अपने नाद से संपूर्ण ब्रह्मांड को वाणी, संगीत और चेतना का वरदान दिया।
इस कारण माघ शुक्ल पंचमी को उनके प्राकट्य दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।
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