विस्तृत उत्तर
डमरू शिव का प्रमुख वाद्य और प्रतीक है:
आध्यात्मिक अर्थ
- 1सृष्टि की ध्वनि (नाद ब्रह्म): शिव के डमरू से 'ॐ' की ध्वनि उत्पन्न = नाद ब्रह्म = सृष्टि का मूल कंपन। सृष्टि ध्वनि से आरंभ हुई — डमरू = सृजन का प्रतीक।
- 2महेश्वर सूत्र: शिव के डमरू की 14 ध्वनियों से संस्कृत व्याकरण के 14 सूत्र (माहेश्वरी सूत्र) उत्पन्न — पाणिनि ने इन्हीं से अष्टाध्यायी रची। 'अइउण्, ऋलृक्, एओङ्...' — भाषा/ज्ञान का मूल।
- 3द्वैत का संगम: डमरू = दो त्रिकोण जुड़े — शिव+शक्ति, पुरुष+प्रकृति, सृजन+संहार का संगम बिंदु।
- 4तांडव नृत्य: नटराज शिव के हाथ में डमरू = सृष्टि चक्र। डमरू बजा = सृजन, अग्नि = संहार — दोनों एक साथ।
- 5जागृति: डमरू ध्वनि = आत्मा की जागृति, अज्ञान तंद्रा से बाहर निकालना।
'ॐ' और डमरू: डमरू की गूंज = 'ॐ' = ब्रह्मांड का मूल कंपन। शिव = नाद योग के आदि गुरु।





