ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
शिव दर्शन📜 शिव पुराण, महेश्वर सूत्र, नाद योग1 मिनट पठन

शिव के डमरू की ध्वनि का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

सृष्टि ध्वनि — डमरू से 'ॐ' = नाद ब्रह्म। 14 ध्वनि = महेश्वर सूत्र → संस्कृत व्याकरण (पाणिनि)। दो त्रिकोण = शिव+शक्ति। नटराज: डमरू=सृजन, अग्नि=संहार। आत्मा जागृति।

📖

विस्तृत उत्तर

डमरू शिव का प्रमुख वाद्य और प्रतीक है:

आध्यात्मिक अर्थ

  1. 1सृष्टि की ध्वनि (नाद ब्रह्म): शिव के डमरू से 'ॐ' की ध्वनि उत्पन्न = नाद ब्रह्म = सृष्टि का मूल कंपन। सृष्टि ध्वनि से आरंभ हुई — डमरू = सृजन का प्रतीक।
  2. 2महेश्वर सूत्र: शिव के डमरू की 14 ध्वनियों से संस्कृत व्याकरण के 14 सूत्र (माहेश्वरी सूत्र) उत्पन्न — पाणिनि ने इन्हीं से अष्टाध्यायी रची। 'अइउण्, ऋलृक्, एओङ्...' — भाषा/ज्ञान का मूल।
  3. 3द्वैत का संगम: डमरू = दो त्रिकोण जुड़े — शिव+शक्ति, पुरुष+प्रकृति, सृजन+संहार का संगम बिंदु।
  4. 4तांडव नृत्य: नटराज शिव के हाथ में डमरू = सृष्टि चक्र। डमरू बजा = सृजन, अग्नि = संहार — दोनों एक साथ।
  5. 5जागृति: डमरू ध्वनि = आत्मा की जागृति, अज्ञान तंद्रा से बाहर निकालना।

'ॐ' और डमरू: डमरू की गूंज = 'ॐ' = ब्रह्मांड का मूल कंपन। शिव = नाद योग के आदि गुरु।

📜
शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, महेश्वर सूत्र, नाद योग
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

डमरूध्वनिनादअर्थ

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

शिव के डमरू की ध्वनि का आध्यात्मिक अर्थ क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको शिव दर्शन से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर शिव पुराण, महेश्वर सूत्र, नाद योग पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।