विस्तृत उत्तर
मानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र होते हैं जिन्हें 'चक्र' कहा जाता है। ये चक्र मूलाधार (रीढ़ के सबसे निचले हिस्से) से लेकर सहस्रार (मस्तिष्क के ऊपरी भाग) तक स्थित हैं। मंत्रों की ध्वनि तरंगें सीधे इन चक्रों की सुप्त ऊर्जा को जाग्रत करने का कार्य करती हैं।
प्रत्येक चक्र का अपना एक विशिष्ट बीज मंत्र है। मूलाधार का 'लं' (Lam), स्वाधिष्ठान का 'वं' (Vam), मणिपूर का 'रं' (Ram), अनाहत का 'यं' (Yam), विशुद्धि का 'हं' (Ham) और आज्ञा चक्र का 'ॐ' (Om) है। जब साधक गहरे ध्यान में इन बीजाक्षरों का मानसिक उच्चारण करता है, तो ध्वनि का कंपन (Vibration) उस विशिष्ट चक्र की ग्रंथियों को खोलता है। इससे शारीरिक रोगों का नाश होता है और साधक का आध्यात्मिक स्तर ऊपर उठने लगता है।





