विस्तृत उत्तर
जब परब्रह्म ने 'एकोऽहं बहुस्याम' का संकल्प किया, तो उनमें जो प्रथम स्पंदन हुआ, वही 'नाद' था। इसी नाद से सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई।
एकोऽहं बहुस्याम' का अर्थ है — 'मैं एक हूँ, बहुत हो जाऊँ।
'एकोऽहं बहुस्याम' का अर्थ है 'मैं एक हूँ, बहुत हो जाऊँ' — यह परब्रह्म का वह संकल्प है जिसके प्रथम स्पंदन (नाद) से सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई।
जब परब्रह्म ने 'एकोऽहं बहुस्याम' का संकल्प किया, तो उनमें जो प्रथम स्पंदन हुआ, वही 'नाद' था। इसी नाद से सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई।
एकोऽहं बहुस्याम' का अर्थ है — 'मैं एक हूँ, बहुत हो जाऊँ।
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