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विस्तृत उत्तर
एकोऽहं बहुस्याम का सरल अर्थ है, 'मैं एक हूँ, अब अनेक हो जाऊँ।' इस कथा में इसे सृष्टि की प्रथम दिव्य इच्छा माना गया है। परम चेतना स्वयं में पूर्ण होते हुए भी लीला के लिए अनेक रूपों में प्रकट होती है। इसी भाव से अव्यक्त शून्य में स्पंदन उठता है और आगे जगत की विविधता प्रकट होती है।
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