विस्तृत उत्तर
वसंत पंचमी विद्या, कला, संगीत, बुद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में पूर्ण उल्लास के साथ मनाया जाता है।
यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, अपितु यह ऋतु-परिवर्तन, मानवीय मेधा के जागरण और प्रकृति की सृजनात्मक ऊर्जा के प्रस्फुटन का महोत्सव है।
भारतीय चंद्र-सौर पंचांग (Lunisolar Calendar) के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह उत्सव संपन्न होता है।
मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) के पश्चात सूर्य अपनी उत्तरायण यात्रा आरंभ करता है, जिससे शीत ऋतु का शमन होता है और प्रकृति एक 40 दिवसीय संधिकाल में प्रवेश करती है, जिसका पूर्ण प्रस्फुटन होली के समय होता है। इसी संधिकाल के मध्य में वसंत पंचमी का पर्व मानव मस्तिष्क में सत्त्व गुण के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है।
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