लोकनैमित्तिक प्रलय में महर्लोक की क्या स्थिति होती है?नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर संकर्षण की अग्नि के ताप से निर्जन हो जाता है (कृतक)। भृगु आदि ऋषि जनलोक चले जाते हैं। यही कृतकाकृतक प्रकृति है।#नैमित्तिक प्रलय#महर्लोक#कृतकाकृतक
लोकमहर्लोक में कौन-कौन से ऋषि रहते हैं?महर्लोक में महर्षि भृगु, मार्कण्डेय मुनि, भृगु वंश के ऋषि, सिद्ध योगी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी और मन्वन्तर के सेवानिवृत्त ऋषि रहते हैं।#महर्लोक#ऋषि
लोकमहर्लोक किसका निवास स्थान है?महर्लोक में महर्षि भृगु जैसे महान प्रजापति, पितृगण, सिद्ध योगी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी और मार्कण्डेय मुनि जैसी महान आत्माएं निवास करती हैं।#महर्लोक#निवासी#भृगु
लोकजनलोक में भृगु आदि ऋषि भी रहते हैं क्या?हाँ, जनलोक में भृगु जैसे महान प्रजापति और प्रलय के समय महर्लोक के ऋषि आश्रय लेते हैं।#जनलोक#भृगु#ऋषि
लोकजनलोक का संबंध प्रजापतियों से कैसे है?जनलोक प्रजापतियों का आश्रय है, जो प्रलय के बाद नई सृष्टि में भूमिका निभाते हैं।#जनलोक#प्रजापति#सृष्टि