विस्तृत उत्तर
काव्या माता का सिर जुड़ने की कथा उनके पुनर्जीवन से जुड़ी है। विष्णु के सुदर्शन चक्र ने उनका मस्तक धड़ से अलग कर दिया था। भृगु ऋषि लौटे, पत्नी की मृत्यु देखी और विष्णु को श्राप दिया। फिर उन्होंने काव्या माता को वापस जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने कटे हुए सिर को धड़ से मिलाया, मंत्रों से सिद्ध जल छिड़का और अपने सत्य-संकल्प की घोषणा की। उसी क्षण शरीर की नसें और घाव जुड़ गए, प्राण लौट आए और काव्या माता जीवित होकर उठ बैठीं। यह ऋषि-तपोबल की अद्भुत कथा मानी जाती है।
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