विस्तृत उत्तर
भृगु ऋषि ने काव्या माता को अपने तपोबल और सत्य-संकल्प से जीवित किया। पहले उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया, फिर अपनी पत्नी के शरीर के पास आए। उन्होंने काव्या माता के कटे हुए सिर को सावधानी से धड़ से मिलाया। इसके बाद कमंडलु से मंत्रयुक्त जल लिया और सत्य का संकल्प किया कि यदि उनका वेदाध्ययन, तप और धर्माचरण सत्य है, तो उनकी पत्नी पुनर्जीवित हो जाएँ। जल छिड़कते ही काव्या माता के घाव जुड़ गए, प्राण लौट आए और वे ऐसे उठीं मानो गहरी निद्रा से जागी हों।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
