विस्तृत उत्तर
शुक्राचार्य की माता काव्या माता थीं। वे महर्षि भृगु की पत्नी थीं और इसलिए शुक्राचार्य भृगु वंश से संबंधित महान तपस्वी माने जाते हैं। काव्या माता स्वयं भी योगशक्ति, पतिव्रत धर्म और तपोबल से संपन्न थीं। उनके कारण ही असुरों को भृगु आश्रम में शरण मिली, क्योंकि वे शुक्राचार्य के शिष्य थे। काव्या माता का वध शुक्राचार्य के जीवन की अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। जब शुक्राचार्य बाद में लौटे और उन्हें माता के वध का पता चला, तो देवताओं और विष्णु के प्रति उनका रोष और दृढ़ हो गया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
