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क्या है

अहंकार क्या है?(11)

अहंकार का अर्थअहंकार क्या है?अहंकार का महत्व
सरल उत्तर

राजस अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न रजोगुण की अधिकता वाला अहंकार है।

स्रोत प्रश्न: राजस अहंकार क्या है? →
लोक

महर्लोक में 'ज्ञान यज्ञ' क्या होता है?

ज्ञान यज्ञ में ऋषिगण अपने अहंकार, अज्ञान और चित्त-वृत्तियों की आहुति परम सत्य (ब्रह्म) की अग्नि में देते हैं। यह भौतिक यज्ञ से उच्च कोटि की आत्म-शुद्धि है।

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साधना मार्गदर्शन

आध्यात्मिक उन्नति में सबसे बड़ी बाधा क्या है?

अहंकार (सर्वसम्मत)। 'मैं spiritual'=सबसे खतरनाक। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' गीता: अहंकार=आसुरी। उपाय: सेवा, समर्पण, गुरु, विनम्रता।

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सृष्टि तत्त्व

राजस अहंकार क्या है?

राजस अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न रजोगुण की अधिकता वाला अहंकार है।

#राजस अहंकार#रजोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्व

सात्त्विक अहंकार क्या है?

सात्त्विक अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न संकल्प-अध्यवसायवृत्तिरूप अहंकार है।

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लोक

हृदय ग्रंथि क्या है

हृदय ग्रंथि अहंकार और ममता की अज्ञान-जनित गाँठ है।

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लोक

रसातल लोक का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

रसातल भौतिक आसक्ति, शक्ति के अहंकार और ईश्वरीय सत्ता के प्रति विद्रोही चेतना का प्रतीक है।

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लोक

भागवत (5.24.16) श्लोक का तात्विक अर्थ क्या है?

भागवत (5.24.16) का तात्विक अर्थ — भौतिक भोग (हाटक रस) व्यक्ति में मिथ्या अहंकार जगाता है। वह ईश्वर समझने लगता है जबकि यह आत्मज्ञान का सबसे बड़ा पतन है।

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लोक

हाटक रस का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या है?

हाटक रस पीने से मिथ्या अहंकार जाग्रत होता है — व्यक्ति खुद को ईश्वर समझता है, दस हजार हाथियों का बल महसूस करता है और मृत्यु का भय भूल जाता है।

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महिषासुर वध

महिषासुर का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

महिष (भैंसा) = आलस्य, अज्ञान, तमोगुण। असुर = भीतर के पाँच विकार (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार)। रूप बदलना = अहंकार की मायावी वृत्तियाँ। देवी द्वारा वध = भीतर के 'पशुत्व' और 'अहंकार' का मर्दन। मोक्ष = भीतर की परम चेतना (देवी) को पहचानना।

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भक्ति एवं आध्यात्म

भगवान की भक्ति में सबसे बड़ी बाधा क्या है

भक्ति में सबसे बड़ी बाधाएँ हैं — अहंकार, विषय-वासना, अश्रद्धा-संशय, कुसंग और अधीरता। इनमें सबसे बड़ी बाधा अहंकार है — क्योंकि 'मैं' की भावना समर्पण को रोकती है।

#भक्ति#बाधा#अहंकार
पूजा रहस्य

पूजा में नारियल फोड़ने का महत्व क्या है?

नारियल फोड़ना: अहंकार का समर्पण — जटाएं अहंकार, खोल पुराने संस्कार, गिरी शुद्ध आत्मा। तोड़ना = 'मैं' को भगवान के सामने तोड़ना। शाक्त परंपरा में रक्त बलि का सात्विक विकल्प। पूर्ण समर्पण का प्रतीक।

#नारियल फोड़ना#अहंकार#समर्पण
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

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