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क्या है

ऋग्वेद क्या है?(9)

ऋग्वेद का अर्थऋग्वेद क्या है?ऋग्वेद का महत्व
सरल उत्तर

नासदीय सूक्त ऋग्वेद (१०।१२९) का दार्शनिक सूक्त है जिसमें ७ मन्त्रों में सृष्टि-पूर्व की अवस्था का वर्णन है। उस समय न सत् था, न असत् — केवल तमस था। पहले 'काम' उत्पन्न हुआ और सृष्टि आरम्भ हुई। यह विश्व-साहित्य में सृष्टि-रहस्य पर सबसे पुरानी दार्शनिक रचना है।

स्रोत प्रश्न: नासदीय सूक्त क्या है ऋग्वेद में? →
मंत्र ज्ञान

गायत्री मंत्र का पूरा अर्थ क्या है शब्दशः?

ऋग्वेद 3.62.10: 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।' अर्थ: उस श्रेष्ठ परमात्मा (सविता) के दिव्य तेज का हम ध्यान करें, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे। ऋषि विश्वामित्र।

#गायत्री मंत्र#ऋग्वेद#सावित्री
दिव्यास्त्र

पर्जन्य देव कौन हैं?

पर्जन्य देव वर्षा, मेघ और उर्वरता के अधिपति देवता हैं। ऋग्वेद में उनसे समय पर वर्षा और प्रजा के कल्याण की प्रार्थना की गई है।

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मंत्र का स्वरूप और अर्थ

महामृत्युंजय मंत्र का वैदिक स्वरूप क्या है?

वैदिक स्वरूप 32 अक्षरों का है, ॐ जोड़ने पर 33 अक्षरों का 'त्रयस्त्रिशाक्षरी' मंत्र बनता है: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥'

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देवी-देवता परिचय

वरुण देव कौन हैं और क्या करते हैं?

वरुण देव जल, समुद्र और नदियों के अधिपति हैं। वे पश्चिम दिशा के दिक्पाल, सत्य के रक्षक और न्याय के देवता हैं। उनका वाहन मगरमच्छ और अस्त्र पाश है।

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वेद एवं शास्त्र

वेद में सोम क्या है?

वेद में सोम के तीन मुख्य अर्थ हैं — एक पर्वतीय लता जिसका रस यज्ञ में अर्पित होता था, चन्द्रमा, और प्रसंगानुसार ईश्वर/प्राण/आनन्द। यह मादक पदार्थ नहीं था — वेद में सोम और मद्य (सूरा) अलग-अलग बताये गये हैं। सोमरस पुष्टिकारक और आयुवर्धक था।

#सोम#सोमरस#ऋग्वेद
वेद एवं शास्त्र

नासदीय सूक्त क्या है ऋग्वेद में?

नासदीय सूक्त ऋग्वेद (१०।१२९) का दार्शनिक सूक्त है जिसमें ७ मन्त्रों में सृष्टि-पूर्व की अवस्था का वर्णन है। उस समय न सत् था, न असत् — केवल तमस था। पहले 'काम' उत्पन्न हुआ और सृष्टि आरम्भ हुई। यह विश्व-साहित्य में सृष्टि-रहस्य पर सबसे पुरानी दार्शनिक रचना है।

#नासदीय सूक्त#ऋग्वेद#सृष्टि उत्पत्ति
मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद 7.59.12 का है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...'। अर्थ: तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें जैसे खीरा पककर बेल से स्वतः अलग होता है। यह भारतीय परंपरा का सर्वश्रेष्ठ रोग-मृत्यु रक्षा मंत्र है।

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वेद परिचय

वेद क्या हैं?

वेद हिंदू धर्म के सर्वोच्च अपौरुषेय (ईश्वरीय) ग्रंथ हैं — ऋग्वेद (देव स्तुति), यजुर्वेद (यज्ञ विधि), सामवेद (संगीत पूजा), अथर्ववेद (जीवन विज्ञान)। वेदव्यास ने इन्हें चार भागों में विभाजित किया। प्रत्येक वेद में संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद — चार भाग हैं।

#वेद#चार वेद#श्रुति
मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है। अर्थ — तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।

#महामृत्युंजय#मंत्र#ऋग्वेद
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