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क्या है

जलाभिषेक क्या है?(8)

जलाभिषेक का अर्थजलाभिषेक क्या है?जलाभिषेक का महत्व
सरल उत्तर

गंगाजल महत्त्व: गंगा = शिव-जटा-विनिर्गता (शिव के माथे से उतरी)। स्कंद पुराण: गंगाजल अभिषेक से सर्व-जन्म-पाप नाश। पितृ-मोक्ष। देवी भागवत: 68 तीर्थों का फल। काशी में विश्वनाथ पर गंगाजल = मोक्ष। गंगाजल न हो तो शुद्ध जल में कुछ बूँदें मिलाएँ।

स्रोत प्रश्न: जलाभिषेक में गंगाजल का महत्व क्या है? →
पूजा विधि एवं कर्मकांड

शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका क्या है

शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका — सोमवार को बेलपत्र से सुशोभित एक लोटा जल शिवलिंग पर चढ़ाएँ, 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार जपें। आशुतोष हैं वे — सच्चे भाव से की एक छोटी सी पूजा पर्याप्त है।

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शिव पर्व

श्रावण मास में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?

प्रातःकाल सर्वोत्तम। गंगाजल श्रेष्ठ, शुद्ध जल भी स्वीकार्य। तांबे/कांसे/मिट्टी के लोटे से (शंख वर्जित)। 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए। जलाधारी उत्तर दिशा। शिव पुराण: 'जलेन वृष्टिमाप्नोति' = धन प्राप्ति। केवल सोमवार नहीं, प्रतिदिन चढ़ाएं। निर्माल्य जल ग्रहण न करें।

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मंदिर नियम

मंदिर में अभिषेक करवाने के नियम क्या हैं?

अभिषेक नियम: स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें। शिवलिंग पर दक्षिण मुख कर, उत्तर से जल गिराएँ। क्रम: जल→दूध→दही→घी→शहद→पंचामृत→चंदन→गंगाजल। 'ॐ नमः शिवाय' जप अनिवार्य। बिल्वपत्र अर्पित करें। तुलसी/केतकी वर्जित। पुजारी के निर्देशानुसार करें।

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शिव पूजा

जलाभिषेक में गंगाजल का महत्व क्या है?

गंगाजल महत्त्व: गंगा = शिव-जटा-विनिर्गता (शिव के माथे से उतरी)। स्कंद पुराण: गंगाजल अभिषेक से सर्व-जन्म-पाप नाश। पितृ-मोक्ष। देवी भागवत: 68 तीर्थों का फल। काशी में विश्वनाथ पर गंगाजल = मोक्ष। गंगाजल न हो तो शुद्ध जल में कुछ बूँदें मिलाएँ।

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शिव पूजा

जलाभिषेक करने का सही समय क्या है?

जलाभिषेक समय: ब्रह्म मुहूर्त (सर्वोत्तम)। प्रदोष काल (त्रयोदशी को सूर्यास्त बाद — स्कंद पुराण)। सोमवार — शिव-दिन। सावन — संपूर्ण मास श्रेष्ठ। महाशिवरात्रि — 4 प्रहर अभिषेक। राहु काल में वर्जित।

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शिव पूजा

जलाभिषेक क्या होता है?

जलाभिषेक = शिवलिंग पर पवित्र जल से स्नान कराना। शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): शिवलिंग पर जल-अर्पण = सर्वाधिक प्रिय पूजा। तीन स्तर: सामान्य जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, रुद्राभिषेक। शिवलिंग = ब्रह्म का प्रतीक; जल = चेतना का प्रवाह।

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अभिषेक विधि

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?

तांबे के लोटे से पतली निरंतर धारा में 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए जल चढ़ाएं। गंगाजल सर्वोत्तम है। शिवलिंग की जलाधारी (सोमसूत्र) न लांघें — इसीलिए आधी परिक्रमा। सोमवार और श्रावण में जलाभिषेक विशेष पुण्यकारी है।

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पूजा विधि

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?

तांबे के लोटे से गंगाजल या शुद्ध जल, 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के साथ शिवलिंग पर धीमी धारा में अर्पित करें। जलहरी को न लांघें और शिवलिंग की आधी परिक्रमा (बाईं ओर) करें।

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