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शिव पूजा📜 शिव पुराण, स्कंद पुराण (प्रदोष माहात्म्य), ज्योतिष शास्त्र2 मिनट पठन

जलाभिषेक करने का सही समय क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

जलाभिषेक समय: ब्रह्म मुहूर्त (सर्वोत्तम)। प्रदोष काल (त्रयोदशी को सूर्यास्त बाद — स्कंद पुराण)। सोमवार — शिव-दिन। सावन — संपूर्ण मास श्रेष्ठ। महाशिवरात्रि — 4 प्रहर अभिषेक। राहु काल में वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

जलाभिषेक के लिए शास्त्रों में विशिष्ट काल और तिथियों का उल्लेख मिलता है।

प्रतिदिन के लिए श्रेष्ठ समय

1ब्रह्म मुहूर्त (सर्वोत्तम)

सूर्योदय से डेढ़ घंटे पूर्व — सात्विक ऊर्जा सर्वाधिक, मन शांत, वायुमंडल शुद्ध।

2प्रदोष काल (विशेष महत्त्व)

स्कंद पुराण (प्रदोष माहात्म्य): त्रयोदशी तिथि को सूर्यास्त के बाद 1.5 घंटे का काल 'प्रदोष काल' है। इस समय किया जलाभिषेक अत्यंत फलदायक — भगवान शिव प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

3अभिजित मुहूर्त

दोपहर 12 बजे के आसपास — सूर्य-मध्य का समय।

विशेष तिथियाँ

  • सोमवार — शिव को अर्पित दिन; सोमवार का जलाभिषेक विशेष फलदायक
  • त्रयोदशी (प्रदोष) — मासिक प्रदोष; सर्वाधिक शुभ
  • सावन मास — संपूर्ण सावन मास शिव-पूजा के लिए श्रेष्ठ
  • महाशिवरात्रि — रात्रि के चार प्रहरों में अभिषेक
  • अमावस्या/पूर्णिमा — पितृ-शांति और मोक्ष के लिए

वर्जित समय: सूर्यास्त के बाद सामान्य दिनों में (प्रदोष को छोड़कर), राहु काल में जलाभिषेक नहीं करना चाहिए।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, स्कंद पुराण (प्रदोष माहात्म्य), ज्योतिष शास्त्र
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