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क्या है

ब्रह्म क्या है?(10)

ब्रह्म का अर्थब्रह्म क्या है?ब्रह्म का महत्व
सरल उत्तर

ब्रह्म इस सारे विश्व का परम सत्य है। तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' — ब्रह्म सत्य, ज्ञान और अनंत है। अद्वैत वेदांत के अनुसार 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या' — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है।

स्रोत प्रश्न: ब्रह्म क्या है? →
सनातन सिद्धांत

मोक्ष क्या है?

मोक्ष = जन्म-मृत्यु के चक्र से पूर्ण मुक्ति। चार पुरुषार्थों में सर्वोच्च। चार मार्ग: कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग, राज योग। अद्वैत: आत्मा = ब्रह्म (शंकर)। विशिष्टाद्वैत: आत्मा ईश्वर में (रामानुज)। द्वैत: भक्ति से (मध्व)। मोक्ष = सच्चिदानंद की अवस्था।

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उपनिषद

उपनिषद क्या हैं?

उपनिषद = गुरु के समीप बैठकर प्राप्त ब्रह्मज्ञान। वेद का अंतिम व उच्चतम भाग — इसीलिए 'वेदांत'। विषय: ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष, माया। गीता + ब्रह्मसूत्र + उपनिषद = प्रस्थानत्रयी। ज्ञान प्रधान, कर्मकांड गौण।

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साधु और संत

संत किसे कहा गया है?

सत् शब्द का अर्थ ब्रह्म है; जो अंत में ब्रह्म को प्राप्त करते हैं, वे संत कहलाते हैं।

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लोक

सद्यो मुक्ति क्या है?

सद्यो मुक्ति = तत्काल मोक्ष। इसी जन्म में निर्गुण ब्रह्म का साक्षात्कार करने वाले यहीं परब्रह्म में विलीन हो जाते हैं — उन्हें सत्यलोक जाने की जरूरत नहीं।

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वेद एवं उपनिषद

अद्वैत वेदांत का सरल अर्थ क्या है?

अद्वैत वेदांत का सरल अर्थ है — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है, यह जगत माया के कारण भिन्न प्रतीत होता है पर वास्तव में अभिन्न है, और जीव ब्रह्म से अलग नहीं बल्कि ब्रह्म ही है। जब यह ज्ञान होता है तो मोक्ष मिलता है।

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वेद एवं उपनिषद

केनोपनिषद का मुख्य संदेश क्या है?

केनोपनिषद का मुख्य संदेश है — ब्रह्म वह परम शक्ति है जो मन, नेत्र, कान सबको चलाती है, पर स्वयं किसी इंद्रिय से नहीं जानी जा सकती। जो मानता है 'मैं जानता हूँ' वह नहीं जानता। इसमें देवताओं के अहंकार-नाश की कथा के माध्यम से यह सिखाया गया है कि समस्त शक्ति ब्रह्म की है।

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हिंदू दर्शन

सच्चिदानंद का अर्थ क्या है

सच्चिदानंद = सत् (शाश्वत अस्तित्व) + चित् (शुद्ध चेतना/ज्ञान) + आनंद (परम सुख)। यह ब्रह्म और आत्मा का स्वरूप है। तैत्तिरीय उपनिषद — 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म'। सरल अर्थ: मैं हूं + मैं जानता हूं + मैं आनंदित हूं = आत्मा का मूल स्वभाव।

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शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में परम सत्य क्या है?

उपनिषदों में परम सत्य ब्रह्म है — 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' (तैत्तिरीय 2/1)। 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' — यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म है (छान्दोग्य 3/14/1)। 'नेति नेति' — परम सत्य किसी परिभाषा में नहीं बंधता। 'तत्त्वमसि' — वह परम सत्य तू ही है — यह उपनिषदों का सर्वोच्च उद्घोष है।

#परम सत्य#उपनिषद#ब्रह्म
शास्त्र ज्ञान

हिंदू धर्म में उपनिषद का महत्व क्या है?

उपनिषद वेदों का सार और वेदांत के आधार-ग्रंथ हैं। इनमें आत्मा-ब्रह्म की एकता का परम ज्ञान है। चार महावाक्य — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि' आदि — उपनिषदों की सर्वोच्च शिक्षाएं हैं।

#उपनिषद#वेदांत#ब्रह्मज्ञान
सनातन सिद्धांत

ब्रह्म क्या है?

ब्रह्म इस सारे विश्व का परम सत्य है। तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म' — ब्रह्म सत्य, ज्ञान और अनंत है। अद्वैत वेदांत के अनुसार 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या' — ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है।

#ब्रह्म#परब्रह्म#सच्चिदानंद
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